(गीता-21) दुनिया का सबसे बड़ा झूठ, जिसके शिकार आप भी हैं || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023)

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वीडियो जानकारी: 08.09.23, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा

प्रसंग:
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताऽहमिति मन्यते ।।
वास्तविकता ये है कि तीन गुणों से उत्पन्न शरीर और इन्द्रियों के द्वारा ही संसार के सब काम होते हैं लेकिन अंधकार से अंधा मनुष्य सोचता है 'मैंने किया'।
~ श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 3, श्लोक 27

~ समर्पण का असली अर्थ क्या है?
~ दु:ख हमें क्यों मिलता है?
~ जीवन दु:ख क्यों नहीं है?
~ जीवन दु:ख कब तक है?
~ सच किसके लिए नहीं है?

Without the Vedanta every religion is superstition; with it everything becomes religion.
~ Swami Vivekananda

संगीत: मिलिंद दाते
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